Rajpath Par

अमरनाथ अजेय का यह काव्य-संग्रह राजपथ पर अत्यंत लोकप्रिय कविताओं का संकलन है। 'राजपथ पर' से गुजरते हुए ऐसा जान पड़ता है कि मैं खुद ही मन की गहरी झील में उतर चुका हूं,और वहां सब कुछ तलाशनें की कोशिश कर रहा हूं, जिसे अब तक हासिल नहीं कर पाया हूं। बहुत आसान नहीं होता जंगलों से गुजरना,पत्तों की हरियाली को आत्मसात करना। यह जो मन का हरापन है, अमरनाथ अजेय के गीतों में साफ-साफ देखा जा सकता है। अजेय जी खुद को विश्लेषित करते हुए सामाजिक संरचना को भी विश्लेषित करने का सफल प्रयास अपनी कविताओं में किया है। लोक भूमि की जटिलताओं और शहरातीकरण पर अजेय जी ने कविताओं के माध्यम से गहरी चोट किया है।उनके ही शब्दों में'मेरी कविताओं में जन चेतना के स्तर पर उद्घोष अंतरनिहित है, जो जीवन की खुरदुरी सतहें समतल बनाने,निदाध पतझड़ मे कोपलें फूटने और कोयल के कूकनें का संकेत देती हुई इस संकलन में कविताएं देखी जा सकती हैं।

Comments

Popular posts from this blog

आजादी के आदिवासी दीवाने